उत्तरकाशी- धराली में RSS की ‘संजीवनी’, 80 परिवारों को मिली आपदा से जूझने की नई ताकत

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उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जनपद के धराली क्षेत्र में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने जनजीवन को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। सैकड़ों परिवार बेघर हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग बुनियादी जरूरतों जैसे खाद्य सामग्री और गैस सिलेंडर से भी वंचित हैं। इस विकट स्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पीड़ितों के लिए राहत का हाथ बढ़ाया है, जिससे 80 सर्वाधिक प्रभावित परिवारों को बड़ी मदद मिलेगी।

80 परिवारों को सर्वाधिक नुकसान
धराली गांव के कुल 280 परिवारों में से 80 परिवार ऐसे हैं जो इस आपदा से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। इनके पास न तो गैस सिलेंडर है और न ही भोजन पकाने व जीवनयापन की अन्य आवश्यक सामग्री। इनके लिए हर दिन एक नई चुनौती बनकर सामने आ रहा है।

RSS ने भेजा ‘राहत हाथ’
संकटग्रस्त परिवारों की सहायता के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने त्वरित कदम उठाए। ऋषिकेश के नटराज चौक से एक राहत ट्रक को धराली के लिए रवाना किया गया। इस ट्रक में आवश्यक खाद्य सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और गैस सिलेंडर जैसी जीवनदायिनी सामग्री शामिल है।

सेवा संकल्प का उद्घोष
राहत सामग्री रवाना करते समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक शैलेन्द्र ने कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमेशा राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहा है। आपदा की इस घड़ी में हमारे स्वयंसेवक पीड़ितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। यह सिर्फ सामग्री नहीं, बल्कि यह विश्वास है कि हम सब एक हैं और मिलकर हर चुनौती का सामना करेंगे।”

सामाजिक सहयोग से बढ़ा अभियान
इस राहत अभियान में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के राज्य मंत्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। ऋषिकेश से राहत सामग्री को रवाना करते समय संघ के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल, ऋषिकेश के महापौर शंभु पासवान, प्रतीक कालिया सहित कई स्वयंसेवक और समाजसेवी मौजूद रहे।

महापौर ने की सराहना
ऋषिकेश के महापौर शंभु पासवान ने संघ की इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “यह अत्यंत सराहनीय पहल है। ऐसे समय में जब धराली के लोग गहरे संकट में हैं, संघ की यह मदद उन्हें बड़ी राहत देगी। मैं सभी सामाजिक संगठनों से अपील करता हूँ कि वे आगे आकर पीड़ितों की सहायता करें।”

आपदा की इस भयावह घड़ी में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अन्य सामाजिक संगठनों की यह संयुक्त पहल धराली के पीड़ित परिवारों के लिए न केवल भौतिक सहायता, बल्कि एक नई उम्मीद और जीने की हिम्मत लेकर आई है।

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