एशेज में इंग्लैंड की ऐतिहासिक वापसी, ऑस्ट्रेलिया को चौथे टेस्ट में छह विकेट से हराया

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लगभग 14 साल बाद कंगारुओं की धरती पर टेस्ट जीत, सीरीज में ऑस्ट्रेलिया अब भी 3-1 से आगे

एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट में इंग्लैंड ने दमदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया को उसी की सरजमीं पर छह विकेट से मात दी। महज दूसरे दिन मुकाबला समाप्त हो गया और इंग्लिश टीम ने वर्षों से चला आ रहा हार का सिलसिला तोड़ते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की। हालांकि, सीरीज का परिणाम पहले ही तय हो चुका है, क्योंकि शुरुआती तीन टेस्ट जीतकर ऑस्ट्रेलिया अजेय बढ़त बना चुका है। फिलहाल एशेज सीरीज का स्कोर 3-1 हो गया है।

इस जीत के साथ इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में लगभग 15 साल बाद टेस्ट मैच जीतने का कारनामा किया। इससे पहले इंग्लिश टीम को ऑस्ट्रेलियाई धरती पर जनवरी 2011 में आखिरी टेस्ट जीत नसीब हुई थी। इसके बाद खेले गए तीन एशेज दौरों में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड पर पूरी तरह दबदबा बनाए रखा था। इंग्लैंड की यह जीत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार 18 टेस्ट मैचों की हार की कड़ी को भी खत्म करती है।

कप्तान बेन स्टोक्स और सीनियर बल्लेबाज जो रूट के लिए यह जीत खास रही, क्योंकि दोनों की ऑस्ट्रेलिया में यह पहली टेस्ट जीत है। इससे पहले उनके सभी दौरे हार या ड्रॉ पर समाप्त हुए थे। चौथे टेस्ट में टॉस जीतकर इंग्लैंड ने पहले गेंदबाजी का फैसला किया, जिसे गेंदबाजों ने सही साबित किया। ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली पारी में केवल 152 रन पर सिमट गई।

जवाब में इंग्लैंड की पहली पारी भी संघर्षपूर्ण रही और पूरी टीम 110 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया को मामूली बढ़त मिली, लेकिन दूसरी पारी में कंगारू बल्लेबाज एक बार फिर दबाव में नजर आए और 132 रन पर ढेर हो गए। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने लगातार विकेट झटकते हुए मैच पर पूरी तरह पकड़ बना ली।

175 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की टीम ने संयमित बल्लेबाजी की। हालांकि कुछ विकेट जल्दी गिरे, लेकिन मध्यक्रम ने जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को जीत तक पहुंचा दिया। इंग्लैंड ने छह विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और लंबे समय बाद ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर जीत का जश्न मनाया।

मैच में इंग्लैंड के गेंदबाजों का प्रदर्शन निर्णायक रहा, जिन्होंने दोनों पारियों में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। वहीं बल्लेबाजी में टीम ने धैर्य और समझदारी दिखाते हुए लक्ष्य हासिल किया। इस जीत से इंग्लैंड को भले ही सीरीज में बराबरी न मिली हो, लेकिन आत्मविश्वास और मनोबल के लिहाज से यह जीत बेहद अहम मानी जा रही है।

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